चिता भस्म से रोज इनका होता रूप श्रृंगार

भगवान शिव की भस्म आराधना उनकी अघोरी परंपरा और वैराग्य का प्रतीक है। “चिता भस्म से रोज इनका होता रूप श्रृंगार” भजन हमें शिव जी के उस निराले रूप की याद दिलाता है, जो मोह-माया से परे, मृत्यु को भी अपनी भक्ति में समाहित कर लेते हैं। वे चिता की भस्म से अपने तन को सजाते हैं, जिससे यह संदेश मिलता है कि जीवन और मृत्यु का भेद केवल माया है। जब हम इस भजन का पाठ करते हैं, तो हमें शिवजी के इस अद्भुत स्वरूप की अनुभूति होती है और हमारी भक्ति और भी गहरी हो जाती है।

Chita Bhasm Se Roj Inka Hota Roop Shringar

चिता भस्म से रोज इनका,
होता रूप श्रृंगार,
होता रूप श्रृंगार ,
सभी देवों के महादेवा,
सभी देवों के महादेवा,
है उज्जैन के महाकाल,
महाकाल सरकार मेरे,
महाकाल सरकार।1।

उन्हें चिन्ता नहीं है काल की,
जिस पर हो कृपा महाकाल की,
जिस पर हो कृपा महाकाल की,
महाकाल है बड़े दयालु,
महाकाल हे बड़े दयालु,
करें सबका बेड़ा पार,
महाकाल सरकार मेरे,
महाकाल सरकार।2।

महाकाल को ही बस चाहूं,
महाकाल को दिल में बसाऊं
महाकाल को दिल में बसाऊं,
महाकाल है मेरी दुनिया,
महाकाल है मेरी दुनिया,
और वो ही मेरी सरकार,
महाकाल सरकार मेरे,
महाकाल सरकार।3।

भोले का बड़ा दरबार है,
शिव जग के पालन हार,
शिव जग के पालन हार,
महादेव की किरपा से ही,
महादेव की किरपा से ही,
चलता है मेरा परिवार,
महाकाल सरकार मेरे,
महाकाल सरकार।4।

चिता भस्म से रोज इनका,
होता रूप श्रृंगार,
होता रूप श्रृंगार ,
सभी देवों के महादेवा,
सभी देवों के महादेवा,
है उज्जैन के महाकाल,
महाकाल सरकार मेरे,
महाकाल सरकार।5।

महादेव का भस्म श्रृंगार हमें यह सिखाता है कि नश्वर संसार में कुछ भी स्थायी नहीं है, केवल भक्ति और शिव का नाम ही सत्य है। “चिता भस्म से रोज इनका होता रूप श्रृंगार” भजन की तरह “भस्म लपेटे नंगे भोले”, “डमरू वाले बाबा”, “शिव तांडव स्तोत्र”, और “शिव शंभू तेरी जटा से बहती गंगा” जैसे भजन भी हमें शिवजी के अनंत वैराग्य और दिव्यता से जोड़ते हैं। आइए, इन पावन भजनों का पाठ करें और महादेव की असीम कृपा प्राप्त करें। ????????

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