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माँ अपने दरबार क्यों ना मुझको बुलाया है लिरिक्स

जब भक्त का मन व्याकुल होता है और माँ की कृपा पाने को आतुर रहता है, तब उसके हृदय से यही पुकार उठती है – माँ, अपने दरबार क्यों ना मुझको बुलाया है? यह भजन एक भक्त की गहरी भावनाओं और माँ से जुड़ी उसकी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है। माँ का दरबार हर भक्त के लिए प्रेम, शांति और आशीर्वाद की जगह है, और जब तक माँ की कृपा दृष्टि नहीं पड़ती, तब तक भक्त का मन अधूरा महसूस करता है।

Maa Apane Darbar Kyon Na Mujhko Bulaya Hai

माँ अपने दरबार,
क्यों ना मुझको बुलाया है,
ना चरणों में बिठाया है,
मां अपने दरबार,
क्यों ना मुझको बुलाया है।1।

महिमा महारानी,
तेरे भवन की मैं,
जब भी सुनता हूँ,
मुझको तू मैया कब,
दर पे बुलाएगी,
मैं दिन ये गिनता हूँ,
जिसको तू चाहे,
वो चलके दर तेरे आया है,
क्यों मुझको ना बुलाया है,
मां अपने दरबार,
क्यों ना मुझको बुलाया है।2।

बेटा हूँ मैं तेरा,
माँ अम्बे जगदम्बे,
क्यों मुझको दूर करा,
दर्शन बिना तेरे,
क्या हाल है मेरा,
तू आके देख जरा,
एक तेरा ही नाम,
मैंने मन में रमाया है,
क्यों मुझको ना बुलाया है,
मां अपने दरबार,
क्यों ना मुझको बुलाया है।3।

चिट्ठी मुझे भी माँ,
दर से तेरे आए,
करूँ माँ क्या जतन,
कब तू बुलाएगी,
मैं झूमता आऊं,
मैया मैं तेरे भवन,
बेटे का नाता,
क्यों ना मुझसे निभाया है,
क्यों मुझको ना बुलाया है,
मां अपने दरबार,
क्यों ना मुझको बुलाया है।4।

माँ अपने दरबार,
क्यों ना मुझको बुलाया है,
ना चरणों में बिठाया है,
मां अपने दरबार,
क्यों ना मुझको बुलाया है।5।

माँ अम्बे अपने भक्तों को कभी भी निराश नहीं करतीं। अगर आपके मन में भी यही प्रश्न उठता है कि “माँ, आपने अपने दरबार क्यों ना मुझको बुलाया?” तो विश्वास रखें कि माँ जरूर आपको बुलाएंगी और आपके जीवन को खुशियों से भर देंगी। अगर यह भजन आपको भक्ति और श्रद्धा से भर रहा है, तो “[महिमा निराली तेरी माँ जगदम्बे]” जैसे अन्य भक्तिगीतों को भी सुनें और माँ की भक्ति में डूब जाएं। जय माता दी! ????✨

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