भक्तों के लिए माँ केवल एक देवी नहीं, बल्कि उनकी हर साँस में बसे एक विश्वास की प्रतीक होती हैं। मैया तेरी तस्वीर सिरहाने रखकर सोते हैं भजन भक्तों की गहरी आस्था को दर्शाता है, जहाँ वे माँ की छवि को अपने पास रखकर चैन की नींद सोते हैं। यह भजन माँ की ममता, स्नेह और सुरक्षा को महसूस कराता है और हमें उनके चरणों में समर्पण की भावना से जोड़ता है।
Maiya Teri Tasvir Sirahane Rakhkar Sote Hai
मैया तेरी तस्वीर,
सिरहाने रखकर सोते है,
यही सोच हम अपने,
दोनों नैन भिगोते है,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी।1।
जाने कब आ जाओगी मैं,
आँगन रोज बुहारता,
मेरे इस छोटे से घर का,
कोना कोना सँवारता,
मेरी माँ जगदम्बे,
माँ शेरोवाली,
जिस दिन माँ नहीं आती,
हम जी भर कर रोते है,
यही सोच हम अपने,
दोनों नैन भिगोते है,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी।2।
अपनापन हो अँखियों में,
होठों पे मुस्कान हो,
ऐसे मिलना जैसे की माँ,
जन्मों की पहचान हो,
मेरी माँ जगदम्बे,
माँ शेरोवाली,
आपके खातिर अखियाँ,
मसल मसल कर रोते है,
यही सोच हम अपने,
दोनों नैन भिगोते है,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी।3।
इक दिन ऐसी नींद खुले,
जब माँ का दीदार हो,
‘बनवारी’ फिर हो जाए,
ये अखियाँ बेकार हो,
मेरी माँ जगदम्बे,
माँ शेरावाली,
बस इस दिन के खातिर,
हम तो दिन भर रोते है,
यही सोच हम अपने,
दोनों नैन भिगोते है,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी।4।
मैया तेरी तस्वीर,
सिरहाने रखकर सोते है,
यही सोच हम अपने,
दोनों नैन भिगोते है,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी,
कभी तो तस्वीर से निकलोगी,
कभी तो मेरी मईया पिघलोगी।5।
माँ दुर्गा की छवि मात्र से ही भक्तों के मन को शांति और साहस मिलता है। “मैया तेरी तस्वीर सिरहाने रखकर सोते हैं” भजन हमें माँ की असीम कृपा का अहसास कराता है और उनकी भक्ति में डूब जाने को प्रेरित करता है। यदि इस भजन ने आपके मन को माँ की भक्ति से भर दिया है, तो “[माँ अम्बे को बुलाऊंगी, दरबार सजाऊंगी]” जैसे अन्य भक्तिमय भजन भी अवश्य सुनें और माँ की कृपा प्राप्त करें। जय माता दी! ????✨