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सुनो सुनो ऐ प्राणी जन महिमा जगदम्ब भवानी की लिरिक्स

सुनो सुनो ऐ प्राणी जन महिमा जगदम्ब भवानी की भजन हमें मां जगदंबा की अपार महिमा का स्मरण कराता है। यह सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक आह्वान है, जो हर भक्त के हृदय में मां की भक्ति की लौ जलाता है। जब जीवन में अंधकार छा जाता है और मन असमंजस में होता है, तब मां भवानी की कृपा ही भक्तों को सही राह दिखाती है। आइए, इस दिव्य भजन का आनंद लें और मां की असीम कृपा का अनुभव करें।

Suno Suno Ye Prani Jan Mahima Jagdamb Bhavani Ki

लीला अपरम्पार,
विंध्यवासिनी मात कल्याणी,

सुनो सुनो ऐ प्राणी जन,
महिमा जगदम्ब भवानी की,
जय विंध्यवासिनी माँ,
पर्वत निवासिनी माँ,
जय माँ जय माँ जय माँ।1।

सिद्धपीठ ज्योतिर्य रूप माँ,
आदिशक्ति महारानी,
ममता दया क्षमा की मूरत,
कष्ट हरण कल्याणी,
बसी विंध्य पर्वत पर मैया,
ध्वजा गगन फहराए,
धोए पाँव निरंतर गंगा,
चंद्रकार लहराए,
शिव ब्रम्हादी देव मुनि गाए,
शिव ब्रम्हादी देव मुनि गाए,
कीर्तन सिंह वाहिनी के,
सुनो सुनो ऐ प्राणीजन,
महिमा जगदम्ब भवानी की।2।

तीन अंक से श्रष्टि बनी है,
तीन देव पालनकर्ता,
तीन लोक है तीन श्वांस है,
तीन लोक शाशन कर्ता,
तीन रूप है अष्टभुजा,
कालिका विंध्य माँ शक्ति के,
तीनों तीन कोण पर बैठी,
न्योछावर है भक्ति के,
कुण्डलनी है इस त्रिकोण है,
कुण्डलनी है इस त्रिकोण है,
सिद्धपीठ महारानी के,
सुनो सुनो ऐ प्राणीजन,
महिमा जगदम्ब भवानी की।3।

निराकार शक्ति है माँ,
पत्ता पत्ता ये जाने,
आये बन खप्पर वाली,
साकार रूप दर्शाने,
ममतामई विंध्य माता के,
चरण धूल जो पाए,
ये जीवन तो बने,
दूसरा जनम सफल हो जाए,
मुक्ति द्वार खोले बैठी माँ,
मुक्ति द्वार खोले बैठी माँ,
शरण पड़ो कल्याणी के,
सुनो सुनो ऐ प्राणीजन,
महिमा जगदम्ब भवानी की।4।

सुनो सुनो ऐ प्राणी जन,
महिमा जगदम्ब भवानी की,
जय विंध्यवासिनी माँ,
पर्वत निवासिनी माँ,
जय माँ जय माँ जय माँ।5।

मां भवानी की महिमा अपरंपार है, जो भी भक्त सच्चे मन से उनका गुणगान करता है, उस पर उनकी कृपा सदा बनी रहती है। अगर आपको यह भजन पसंद आया, तो आपको [“तू भीख ना देगी तो मैं शोर मचा दूंगा”](दूसरे भजन का लिंक डालें) भजन भी अवश्य सुनना चाहिए, जिसमें भक्त के हठ और मां की करुणा का अनुपम चित्रण किया गया है। आइए, मां के चरणों में शीश नवाएं और उनकी कृपा का गुणगान करें। जय माता दी! ????

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