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दर दर भटकता फिरा ठोकर बड़ी खाया हूँ – भजन लिरिक्स

कभी-कभी जीवन में व्यक्ति कठिनाइयों और परेशानियों से गुजरता है, जिससे उसकी राह और भी कठिन हो जाती है। दर दर भटकता फिरा ठोकर बड़ी खाया हूँ भजन में इसी दर्द और संघर्ष का वर्णन किया गया है। भजन में भक्त अपनी कठिनाइयों और आघातों को स्वीकार करता है, लेकिन साथ ही माँ से मदद की प्रार्थना भी करता है। जब तक हम माँ की शरण में नहीं आते, हम दर-दर भटकते रहते हैं, लेकिन माँ की कृपा से हर कठिनाई आसान हो जाती है।

Dar Dar Bhatakata Phira Thokar Badi Khaya Hu

दर दर भटकता फिरा,
ठोकर बड़ी खाया हूँ।

दोहा – रूतबा ये मेरे सर को,
तेरे दर से मिला है,
हालाकी मेरा सर भी,
तेरे दर से मिला है,
औरों को जो मिला है माँ,
वो मुकद्दर से मिला है,
पर मुझे तो मेरा मुकद्दर भी,
तेरे दर से मिला है।

दर दर भटकता फिरा,
ठोकर बड़ी खाया हूँ,
दर्शन के लिए मैया,
मैं तेरे द्वारे आया हूँ।1।

जग ने सताया,
जहां ने रुलाया,
तुम मेरा संकट हरो-२,
दर से सवाली,
ना जायेगा खाली,
तुम मेरी झोली भरो-२,
है नहीं कोई जग में,
हमारा तुम्हारे सिवा,
दर्शन के लिए मैया,
मैं तेरे द्वारे आया हूँ।2।

जब जब पुकारा,
दे दिया सहारा,
फरियाद मेरी पढ़ी-२,
चली आओ मैया,
भवर देख कर के,
मेरी नाव तूफां फसी-२,
लगन मेरी तुमसे लगी है,
ये मैय्या सुनो,
दर्शन के लिए मैया,
मैं तेरे द्वारे आया हूँ।3।

तेरे चरण में,
रहूँगा हमेशा,
सुनलो ये अर्जी मेरी-२,
दर का भिखारी,
रखो या उठा दो,
आगे है मर्जी तेरी-२,
नहीं तो आज चौखट पे तेरी,
मैं मर जाऊंगा,
दर्शन के लिए मैया,
मैं तेरे द्वारे आया हूँ।4।

तुम ना करोगी,
तो करम कौन करेगा,
दामन है मेरा खाली,
इसे कौन भरेगा,
ठुकरा दिया है जग ने,
मुझे तेरा सहारा,
आ जाओ मेरी मैय्या,
मैने तुमको पुकारा,
मैंने तुमको पुकारा,
दर्शन के लिए मैया,
मैं तेरे द्वारे आया हूँ।5।

पूजा ना जानु,
सेवा ना जानु,
कैसे मनाऊं तुम्हे-२,
प्रेमी दीवाना,
हुआ आज पागल,
कैसे बताऊं तुम्हे-२,
विजय आज करना,
यही है मेरी आरज़ू,
दर्शन के लिए मैया,
मैं तेरे द्वारे आया हूँ।6।

दर दर भटकता फिरा,
ठोकर बड़ी खाया हूँ,
दर्शन के लिए मैया,
मैं तेरे द्वारे आया हूँ।7।

माँ दुर्गा की कृपा से जीवन में आ रही हर कठिनाई और परेशानी हल हो जाती है। “दर दर भटकता फिरा ठोकर बड़ी खाया हूँ” भजन में भक्ति और विश्वास का संदेश छुपा हुआ है कि जीवन में चाहे जैसे भी हालात हों, अगर हम सच्चे मन से माँ की शरण में आते हैं, तो वो हमें हर मुश्किल से उबार लेती हैं। इस भजन के माध्यम से भक्त अपनी श्रद्धा और विश्वास को माँ के सामने प्रकट करता है, और साथ ही उन्हें विश्वास दिलाता है कि जीवन की सारी मुश्किलें माँ की कृपा से सुलझ जाएंगी। यदि आपको यह भजन प्रोत्साहित करता है, तो “दुर्गा जी के मंदिर में गूंज रही जयकार” भजन भी सुनें, जो माँ के दरबार में भक्ति की महिमा और उनके प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।

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