ओ दर छोड़ के जाउंगा ना मैया कभी तो नैया पार करोगी

भक्त का माँ से प्रेम और विश्वास अटूट होता है, और जब वह उनके चरणों में शरण लेता है, तो कभी भी पीछे नहीं हटता। ओ दर छोड़ के जाऊंगा ना मैया, कभी तो नैया पार करोगी भजन इसी अटूट श्रद्धा को दर्शाता है, जहाँ भक्त माँ से प्रार्थना करता है कि वह उसकी जीवन नैया को भवसागर से पार लगाए। यह भजन माँ की कृपा पर संपूर्ण समर्पण का प्रतीक है, जो हर भक्त के मन को भाव विभोर कर देता है। आइए, इस भजन के माध्यम से माँ से अपने जीवन का मार्ग प्रशस्त करने की प्रार्थना करें।

Vo Dar Chhod Ke Jaunga Na Maiya Kabhi To Naiya Par Karogi

ओ दर छोड़ के जाउंगा ना मैया,
कभी तो नैया पार करोगी।1।

जैसे औरों के किए है दुख दूर माँ,
आस पूरी होगी मेरी भी जरूर माँ,
ओ मेरे सपने भी,
ओ मेरे सपने भी होके दयालु,
माँ तुम्ही साकार करोगी,
ओ दर छोड के जाउँगा ना मैया,
कभी तो नैया पार करोगी।2।

जो भी लेना मैंने लेना तेरे द्वार से,
तेरे होते क्यों मैं मांगू संसार से,
हो जब किसी दिन,,
हो जब किसी दिन रहम तुझे आया,
निराला उपकार करोगी,
ओ दर छोड के जाउँगा ना मैया,
कभी तो नैया पार करोगी।3।

दूर भक्तों से मैया रह ना पाओगी,
आज रूठी हो तो कल मान जाओगी,
हो सारी रहमतों को,
हो सारी रहमतों को मौज में आके,
माँ मुझपे निसार करोगी,
ओ दर छोड के जाउँगा ना मैया,
कभी तो नैया पार करोगी।4।

काम होता है सवाली का पुकारना,
काम तेरा है माँ किस्मते संवारना,
हो मैंने जिद कर,
हो मैंने जिद कर झोली जो पसारी,
तो कैसे इंकार करोगी,
ओ दर छोड के जाउँगा ना मैया,
कभी तो नैया पार करोगी।5।

ओ दर छोड़ के जाउंगा ना मैया,
कभी तो नैया पार करोगी।6।

माँ कभी अपने भक्तों को निराश नहीं करतीं, जो भी सच्चे मन से उनकी शरण में आता है, उसकी नैया पार अवश्य लगती है। ओ दर छोड़ के जाऊंगा ना मैया, कभी तो नैया पार करोगी भजन इसी भक्तिपूर्ण विश्वास को प्रकट करता है। यदि यह भजन आपको माँ की करुणा का अनुभव कराता है, तो “मैं माँ को रिझाने आया हूँ दुनिया को रिझाकर क्या करना” भजन भी अवश्य पढ़े, जिसमें भक्त माँ के प्रेम और आशीर्वाद को पाने की अनूठी भावना प्रकट करता है।

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